Desh Bhaktike Geet

घड़ा कैसा बने?-इसकी एक प्रक्रिया है। कुम्हार मिटटी घोलता, घोटता, घढता व सुखा कर पकाता है। शिशु, युवा, बाल, किशोर व तरुण को संस्कार की प्रक्रिया युवा होते होते पक जाती है। राष्ट्र के आधारस्तम्भ, सधे हाथों, उचित सांचे में ढलने से युवा समाज व राष्ट्र का संबल बनेगा: यही हमारा ध्येय है। "अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है। इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे।।" (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण
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Saturday, November 8, 2014

पशुवत प्रेमप्रदर्शन -पाखंड

पशुवत प्रेमप्रदर्शन -पाखंड 
प्रेम दो दिलों का मिलन है,  
फिर इसका ढिंढोरा कैसा?
सड़क पे इसका प्रदर्शन होना,
आधुनिकता है या पशुओं जैसा; 
विवाह पूर्व मिलन जो हो जाये, 
तो पहली रात, नवउमंग कैसा। 
उच्छृंखलता की आजादी मनालो! 
आधुनिक विषबेल लगाने जैसा।। 
किसी भी जात या भाषा में कहो, -
तिलक टिळक तिलक: তিলক تلک tilak ਤਿਲਕ તિલક ತಿಲಕ திலகமும் తిలక్ തിളക് 
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है |
इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"- तिलक