Desh Bhaktike Geet

घड़ा कैसा बने?-इसकी एक प्रक्रिया है। कुम्हार मिटटी घोलता, घोटता, घढता व सुखा कर पकाता है। शिशु, युवा, बाल, किशोर व तरुण को संस्कार की प्रक्रिया युवा होते होते पक जाती है। राष्ट्र के आधारस्तम्भ, सधे हाथों, उचित सांचे में ढलने से युवा समाज व राष्ट्र का संबल बनेगा: यही हमारा ध्येय है। "अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है। इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे।।" (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण
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Monday, November 17, 2014

राष्ट्र पुनर्जागरण मन्त्र

राष्ट्र पुनर्जागरण मन्त्र 
वन्देमातरम, उत्तिष्ठत जागृत भारत:, सत्य को जाने। आदर्श, नैतिक मूल्य, 
जो समाज अपने आदर्श/इतिहास को विस्मृत कर, छद्म मुखौटे स्वीकारने लगे, उसका पतन सुनिश्चित है। धर्मनिरपेक्षता के नाम हुई यही भूल, परिभाषाएं व सोच विकृत कर, हमारी दुर्दशा का प्रमुख कारण बनी। आदिकाल से ही वो अपने जिन उच्च आध्यात्मिक,सामाजिक और नैतिक मूल्यों को लेकर चला, आओ देश की उन जड़ों से जुड़ें,  युगदर्पण के संग। आत्म गौरव जगा, भारत पुनः विश्व गुरु की प्रतिष्ठा पाये। तिलक, युगदर्पण मीडिया समूह YDMS 7531949051
यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था, आज भी इसमें वह गुण,
योग्यता व क्षमता विद्यमान है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक
विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया |
इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है |
इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"- तिलक