Desh Bhaktike Geet

घड़ा कैसा बने?-इसकी एक प्रक्रिया है। कुम्हार मिटटी घोलता, घोटता, घढता व सुखा कर पकाता है। शिशु, युवा, बाल, किशोर व तरुण को संस्कार की प्रक्रिया युवा होते होते पक जाती है। राष्ट्र के आधारस्तम्भ, सधे हाथों, उचित सांचे में ढलने से युवा समाज व राष्ट्र का संबल बनेगा: यही हमारा ध्येय है। "अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है। इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे।।" (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण
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Friday, December 20, 2013

सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून /प्रोत्साहन कानून

  वन्देमातरम, सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून पर हमारा मत क्या हो, इससे पूर्व यह समझना आवश्यक है, कि इसमे है क्या ? किन्तु एक प्रश्न सबसे अधिक सता रहा था।
भारत के विरुद्ध चल रहे इतने बड़े षड्यंत्र के बारे में इस समाज को कैसे बताया और समझाया जाए। देश का मीडिया इस कानून के सांप्रदायिक पक्ष को नही दिखा रहा है, केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया दिखा रहा है।क्योंकि सांप्रदायिक मुद्दे पर सत्य कथन को  सांप्रदायिक मान मीडिया बच रहा है।.… 
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सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून /प्रोत्साहन कानून

                                                                                        शुक्रवार, 20 दिसम्बर 2013

विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया | 
 इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है |
इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"- तिलक

Wednesday, December 18, 2013

देवयानी खोब्रागडे, व अमानवीय अमरीका

देवयानी खोब्रागडे, व अमानवीय अमरीका 
भारतीय विदेश सचिव सुजाता सिंह की कथित अतिसफल वाशिंगटन यात्रा संपन्न होने के अगले ही दिन 
न्यूयार्क में उप महावाणिज्य दूत 1999 भाविसे चयनित देवयानी खोब्रागडे का अमानवीय अपमान भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक दायित्वों व मर्यादा का उलंघन है। तुच्छ से आरोपों के चलते उन्हें प्रत्यक्ष हथकड़ी लगाकर बंदी बना लिया गया। न्यूयार्क में उप महावाणिज्य दूत सहित राजनयिकों के साथ ऐसा व्यवहार के विरुद्ध अमेरिका से कड़ी आपत्ति प्रकट करते हुए, भारत ने इसे ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ कहा है।
 उक्त घटना के बाद उसने कैसे मान लिया भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक संकट पैदा नहीं हो सकता। किन्तु युगदर्पण की दृष्टी में चिंता का उससे भी बड़ा विषय यह है कि इससे भारत को अपमान के कड़वे घूँट पीने पड़ेंगे। जब मानवाधिकारों के हनन के नाम पर दूसरे देशों को दण्डित करने वाला महिला का अपमान व ऐसे अमानवीय कार्य करेगा, अपने लिए दण्ड भी निर्धारित करना चाहिए अन्यथा उसकी स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी व मानवाधिकार के पाखण्ड नंगे हो जायेंगे।
 यदि अमरीका और उसका राष्ट्रपति वास्तव में स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी तथा स्वतंत्रता व मानवाधिकारों का सम्मान करते हैं, तो बिना विलम्ब किये अपनी गलती स्वीकारते हुए क्षमा मांग लेनी चाहिए, क्योंकि गलती स्वीकारने या क्षमा मांगने में ही बड़प्पन है, अकड़ने में नहीं।
बड़प्पन बड़े देश या पद में नहीं, दिल भी बड़ा होना चाहिए। 
अन्यथा अमरीका और उसके राष्ट्रपति को विश्व महाशक्ति के शासक से अधिक राक्षस के रूप में जानेगी।
 तिलक राज रेलन, सम्पादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS -09911111611
अन्यत्र, हिन्दू समाज व हिदुत्व और भारत, को प्रभावित करने वाली
जानकारी का दर्पण है: विश्वदर्पण | आओ, मिलकर इसे बनायें; -तिलक
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है |
इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"- तिलक

Monday, December 2, 2013

मु.मं.क्या पहली बार यमुनापार ?

मु.मं.क्या पहली बार यमुनापार ?
VOTING_2मुख्यमंत्री पद के लिए अपने प्रत्याशी की भाजपा ने चुनाव से पूर्व घोषणा से ही, पूर्वी दिल्ली का कृष्णा नगर क्षेत्र अचानक चर्चा में आ गया।
कृष्णा नगर ही नहीं, यमुनापार के दूसरे क्षेत्रों में भी यह प्रश्न चर्चा का विषय बन गया कि क्या वास्तव दिल्ली को पहली बार यमुनापार से कोई मुख्यमंत्री मिलेगा। अभी चर्चाओं का बाजार गर्म ही था कि कांग्रेस ने भी एक नया दांव खेलकर कृष्णा नगर को फिर से चर्चा को गर्म कर दिया।
इसी क्षेत्र  से भाजपा के पार्षद रहे, डॉ. वी. के. मोंगा ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का पल्लू पकड़ लिया और कांग्रेस ने मोंगा को हर्षवर्धन के विरुद्ध ही चुनाव मैदान में उतारकर स्पर्धा को रोचक बना दिया। आम आदमी पार्टी भी पीछे नहीं रही, उसने एक मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर और रोचक बना दिया। किन्तु इसके बाद भी यहां मुख्य संघर्ष कांग्रेस और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है।
लोगों का मानना है कि 'आप' ने इशरत अली अंसारी की घोषणा करने में काफी देर लगा दी। इसके चलते अंसारी को लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए अधिक समय नहीं मिल पाया। अधिकतर यही मान रहे हैं कि आम आदमी पार्टी यहां भाजपा के बजाय कांग्रेस को अधिक क्षति पहुंचाएगी। जबकि यहां के रशीद मार्केट में रहने वाले बाबू खान और मोहम्मद युसूफ का कहना है कि यहां मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो व्यक्तिगत रूप से डॉ. हर्षवर्धन को उनकी अच्छी छवि के चलते बहुत पसंद करता है और इसलिए मुस्लिम वोटों का कुछ भाग भाजपा के खाते में भी जाएगा।
विशेषकर उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाए जाने का मुस्लिम वोटरों पर काफी असर पड़ेगा। खुरेजी के रहने वाले मोइनुद्दीन अलवी और गुलजार इससे सहमती नहीं रखते। उनके अनुसार इस क्षेत्र में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है और उन लोगों को इस बात से कोई अन्तर नहीं पड़ेगा कि कांग्रेस ने किसे अपना प्रत्याशी बनाया है। जहां तक भाजपा का प्रश्न है, तो केवल हर्षवर्धन ही नहीं, बल्कि पूरी पार्टी की साख यहां दांव पर लगी हुई है।
विगत 20 वर्षोंसे कृष्णा नगर सीट जीतते आ रहे, डॉ. हर्षवर्धन इस बार जीत की रजत जयंती मना पाएंगे कि नहीं, यह तो 8 दिसंबर को ही पता चलेगा, किन्तु झील में रहने वाले बृज मल्होत्रा और श्याम सेठी का मानना था कि भाजपा द्वारा डॉ. हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाए जाने का लाभ तो उन्हें अवश्य मिलेगा और जो लोग पहले उन्हें वोट देने को लेकर आश्वस्त नहीं थे, वो भी अब उन्हें वोट देने के बारे में सोचेंगे।
किन्तु दूसरी ओर यहां श्रवण कुमार जैसे लोग भी हैं, जिनका कहना है कि 15 वर्षमें इस क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं हुआ। वर्षा होते ही गलियों में पानी भर जाता है और सड़कें तालाब में बदल जाते है। वहीं ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि यह अंतराल शीला के शासन का था अत: डॉ. हर्षवर्धन का मुख्यमंत्री होना आवश्यक है। जहां तक क्षेत्र की महिलाओं का प्रश्न है, तो कई महिलाओं ने बातचीत में यही कहा कि महंगाई उनके लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है और वो इसी को ध्यान में रखकर वोट डालेंगी। इसप्रकार ये सभी बिंदु डॉ. हर्षवर्धन के पक्ष में ही जाते हैं, देखना यह है कि क्या वे मुख्यमंत्री बन पाते हैं ?
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है |
इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"- तिलक