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घड़ा कैसा बने?-इसकी एक प्रक्रिया है। कुम्हार मिटटी घोलता, घोटता, घढता व सुखा कर पकाता है। शिशु, युवा, बाल, किशोर व तरुण को संस्कार की प्रक्रिया युवा होते होते पक जाती है। राष्ट्र के आधारस्तम्भ, सधे हाथों, उचित सांचे में ढलने से युवा समाज व राष्ट्र का संबल बनेगा: यही हमारा ध्येय है। "अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है। इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे।।" (निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण
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Tuesday, October 16, 2012

नव रात्रि /शक्ति पूजन Nav Ratri (9 Divine Nights) worshiping Goddess of Power

नव रात्रि /शक्ति पूजन (9 Devine Nights),   
व्याख्यान -तिलक राज रेलन,  वरि. पत्रकार, लेखक, चिन्तक, संपादक -युग दर्पण मीडिया समूह, 
वास्तव में "नव -रात्रि" का तात्पर्य है " शिवशक्ति की विशेष नौ रातें" जब शक्ति को सहज जागृत किया जा सकता है | यह त्यौहार एक वर्ष में 2 बार मनाया जाता है | एक "चैत्र माह" गर्मियों के आरंभ में, एक बार फिर से "आश्विन माह" सर्दियों के आरंभ में | चेती नवराते को पृथ्वी के आरंभ से तथा शारदीय नवराते को भगवान राम के रावण से युद्ध पूर्व व लंका प्रस्थान हेतु समुद्र पार जाने के समय, शक्ति पूजन इस दिन किया गया मानते हैं | 
मेरी व्यक्तिगत सोच है कि पृथ्वी का आरंभ में गर्म होना व प्रकारांतर में शीतल होना, सृष्टि काल के कल्प का एक चक्र है | उसी का लघु रूप ग्रीष्म और शरद है, और दिन रात है | जैसे वर्तमान प्रणाली में समय का घंटे, मिनट व सेकण्ड मानते हैं | पहले भारतीय सनातन प्रणाली में घटी और पल थे | (इस लेख के इस अंश पर विशेष टिप्पणी चाहूँगा |)
नवरात्रि का महत्व क्या है?
नवरात्रि के मध्य, सार्वभौमिक माँ, सामान्यतः "दुर्गा," जिसे वास्तव में जीवन के दुखों का हरण करने वाली, दुख हरणी के रूप में जाना जाता है, का इस रूप में भगवान की दिव्य शक्ति/ऊर्जा पक्ष का आह्वान किया जाता है | जिसे "देवी" (देवी) या "शक्ति" (ऊर्जा या शक्ति) के रूप में भी जाना जाता है | यह वह ऊर्जा है, जिसका उपयोग भगवान शिव द्वारा सृजन, संरक्षण और विनाश के लिए है |  दूसरे शब्दों में, आप कह सकते हैं कि भगवान स्थिर, शांत रूप नितांत परिवर्तनहीन है और देवी माँ दुर्गा, उसका सक्रिय रूप में सब कुछ करती है | अर्थात एक इसका शांत रूप है दूसरा सक्रीय | इस शांत व सक्रीय के समन्वय व्यापक तत्व को ही अर्ध नारीश्वर कहा जाता है | सच कहूँ तो, हमारी शक्ति पूजा का वैज्ञानिक सिद्धांत है कि ऊर्जा अविनाशी है, की फिर से पुष्टि होती है | यह सदा सर्वत्र है, इसे न बनाया जा सकता है, न मिटाया जा सकता है |
क्यों देवी माँ को दंडवत?
हमें लगता है कि यह शक्ति उस जगत जननी देवी माँ, जो सभी की माँ है, का ही एक रूप, और हम में से सभी बच्चे उसके बच्चे है | प्रश्न उठता हैं,"माँ क्यों, क्यों नहीं पिता"  मुझे बस इतना कहना है कि हमें विश्वास है कि भगवान की महिमा, उनकी लौकिक ऊर्जा, उसकी महानता और वर्चस्व तथा सबसे ऊपर, भगवान के मातृत्व पक्ष को इस रूप में दर्शाया जा सकता है | बस एक बच्चे के लिए इस रूप में या उसकी माँ में, इन सभी गुणों को पाना है |  इसी प्रकार, हम सभी की माँ के रूप में दिखने वाला भगवान, ऐसा वास्तव में, हिंदू धर्म है और विश्व में यही धर्म है | जो भगवान के मातृ पक्ष को इतना महत्व देता है, क्योंकि हम मानते हैं कि यह माँ के रचनात्मक पक्ष है, पूर्ण है |
एक वर्ष में दो बार क्यों?
हर वर्ष गर्मियों के आरंभ और सर्दियों के आरंभ के जलवायु परिवर्तन और सौर प्रभाव के दो बहुत महत्वपूर्ण संधिकाल/ पड़ाव हैं. क्योंकि इन दो संधिकालों में परमात्मा की शक्ति की पूजा के लिए पवित्र अवसर के रूप में माना गया है:
(1) हम मानते हैं कि यह वह दिव्य शक्ति है, जो पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर भ्रमण करने के लिए ऊर्जा प्रदान करती है | यही प्रकृति में बाह्य परिवर्तन तथा संतुलन का कारण है | अत: इस दिव्य शक्ति को ब्रह्मांड के सही संतुलन को बनाए रखने के लिए, धन्यवाद दिया जाना चाहिए | इस अध्यात्मिक सोच के रहते हम प्रकृति का हर रूप में नमन करते रहे, पाश्चत्य अन्धानुकरण में इसका त्याग होते ही, यहाँ भी प्रकृति का शोषण होने लगा |


अखिल ब्रह्माण्ड के कल्याण व मानव मात्र के सदमार्ग हेतु,, दिव्या शक्ति के सुपुत्रों सम्पूर्ण हिन्दू समाज की सद्चेतना जागृत हो, 
इसके लिए भगवती अपने इन पुत्रों को सद्बुद्धि प्रदान करे, नव रात्र की इन शुभ कामनाओं सहित, तिलक व सम्पूर्ण युग दर्पण परिवार.

(2) प्रकृति में परिवर्तन के कारण हम लोगों के शरीर व मन में व्यापक परिवर्तन होते है, और इसलिए, हमारे शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए, हम सभी परमात्मा से पर्याप्त शक्तियां प्रदान करने के निवेदन हेतु शक्ति की पूजा करते हैं |
9 रात और दिन ही क्यों ?
नवरात्रि को यदि 3 दिन के 3 भाग में विभाजित करें, तो यह सर्वोच्च देवी के 3 विभिन्न पक्षों के प्रति समर्पित है | प्रथम 3 दिनों में, माँ के शक्तिरूप में, दुर्गा का आह्वान, क्रम में हमारे सब अशुद्धता, न्यूनता व दोषों के निवारण हेतु किया जाता है |  अगले 3 दिनों, माँ के आध्यात्मिक शक्तियों की प्रदाता, धनलक्ष्मी व कन्या रूपा का आह्वान, तथा वंदन, किया जाता है | जिसकी असीम अनुकम्पा से हमें सुख -शांति व अपार धन -धान्य निर्बाध प्राप्त होता रहता है |  अंतिम 3 दिनों के अंतिम भाग में विवेक व ज्ञान की देवी सरस्वती के रूप में मां की पूजा की जाती है |  इस क्रम में यह जीवन में चतुर्दिक सफलता की दात्री है |  हमें देवी माँ के सभी 3 पक्षों के आशीर्वाद की आवश्यकता है, इसलिए 9 रातों के लिए पूजा. का विधान है | 
शक्ति की आवश्यकता क्यों है ?
इस प्रकार, मेरा सुझाव है कि आप नवरात्रि के मध्य "माँ दुर्गा की पूजा" में अपने माता पिता के साथ सहभागी हो सकते हैं |  वह आप पर धन, शुभ (मंगलकारी), समृद्धि, ज्ञान, और अन्य दिव्या शक्तियों को प्रदान करेगी, जिससे आप जीवन की हर बाधा को पार कर जायेंगे |  याद रखें, इस विश्व में सभी शक्ति अर्थात दुर्गा, की पूजा करते हैं, क्योंकि यहाँ ऐसा कोई नहीं है जो किसी न किसी रूप में शक्ति की कामना कभी भी नहीं करता है |  (ध्यान रहे, आपका सच्चा मित्र कभी, आपको गलत राह दिखने वाला, या अल्प ज्ञान से भटकाने वाला, नहीं, हो सकता, -तिलक, 9911111611)
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका; विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक
विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया | इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है | इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे ||"- तिलक

Tuesday, September 4, 2012

"मेरा देश इंडिया"....

"मेरा देश इंडिया"....- तिलक
कई दिन से सोचता था भारत का अमन चैन जाने कहाँ खो गया है!
वसुधैव कुतुम्कम का प्रणेता भाईचारा था इसे कौन खा गया है!
बटोर ज्ञान, लगाया ध्यान, तब जाना जब कर डाले सब अनुसन्धान!
जब से कथित आज़ादी के साथ भारत देश का बंटवारा हो गया है!
भारत को मिटा कर बना डाले एक हिंदुस्तान व दूजा पाकिस्तान!
पहले भारत नहीं रहने दिया अब न रहा हिंदुस्तान या पाकिस्तान!
पाकिस्तान को वहां की सरकार ने नापाक कर डाला!
यहाँ की सरकार भी कम न थी हिन्दुओं को मिटा डाला!
उनका वो देश अतंकिया है तो मेरा ये देश भी इंडिया है!
"अंधेरों के जंगल में, दिया मैंने जलाया है !
 इक दिया, तुम भी जलादो; अँधेरे मिट ही जायेंगे !!" - तिलक

Wednesday, June 6, 2012

"प्यार वो भी, प्यार ये भी"

"प्यार वो भी, प्यार ये भी"
वो प्यार की बातें करते, हम तलवार की बातें करते हैं;
ललकार वही तो सकता है, जो प्यार वतनसे करते हैं! तिलक, संपादक युग दर्पण मिडिया समूह, .. 9911111611, 9654675533. website:-www. yugdarpan.co.cc, www. yugdarpan.com,
"अंधेरों के जंगल में,दिया मैंने जलाया है!
इक दिया,तुम भी जलादो;अँधेरे मिट ही जायेंगे !!"- तिलक

Wednesday, May 16, 2012

17, मई 2012 आज 17 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन 
माँ, जो गर्भ से मृत्यु तक, हर पल अपने बच्चों के हर दुःख सुख की साथी, जिसकी गोद हर पीड़ा का हरण करती है। बचपन ही नहीं वृद्धावस्था व् जीवन के अंत तक हर पल जब भी तुझे स्मरण करता हूँ भाव विहल हो जाता हूँ। माँ, तेरी याद बहुत आती है, ....माँ, तेरी याद बहुत आती है।
माँ, इन 2 वर्षों में दामाद और बहु भी हो गए हैं शीघ्र ही अगली पीडी भी हो जाएगी। दामाद- सिद्धार्थ है, तथा बहू शालिमा है। तिलक- संपादक युग दर्पण मीडिया समूह, 9911111611, 9654675533.
"अंधेरों के जंगल में,दिया मैंने जलाया है! इक दिया,तुम भी जलादो;अँधेरे मिट ही जायेंगे !!"- तिलक

Tuesday, May 8, 2012

वैचारिक क्रांति द्वारा व्यापक परिवर्तन का शंखनाद 
वन्दे मातरम, 
व्यावसायिक पत्रकारिता सौम्य सार्थक नहीं रही;
सूचनाएं मूल्यजनक बनी मूल्यपरक नहीं रहीं;
समाज, व्यवस्था, जीवन शैली स्वस्थ नहीं रहे;
कपटपूर्ण प्रदर्शन ही है, मन की पवित्रता नहीं रही;
सुधार समर्पित पत्रकारिता हमारा पवित्र मिशन है !..

मित्रों, युग दर्पण मीडिया समूह द्वारा विविध विषयों के 25 ब्लाग, आर्कुट, फेसबुक, व उन पर समुदाय व समूहों तथा ट्विटर के अतिरिक्त 4 यूसर चैनलों का अंतर ताने पर महाजाल ! आपको आमंत्रित करता है:- वैचारिक क्रांति द्वारा आओ हम सब मिलकर मा. जय प्रकाश नारायण की कल्पना का व्यापक परिवर्तन करते भारत को सशक्त,समर्थ व स्वावलंबी तथा संपन्न बनायें ! जय भारत. 
-तिलक, संपादक युग दर्पण मिडिया समूह, .. 
9911111611, 9654675533. website:- www. yugdarpan.co.cc 


पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है-युगदर्पण
"अंधेरों के जंगल में,दिया मैंने जलाया है!
इक दिया,तुम भी जलादो;
अँधेरे मिट ही जायेंगे !!"- तिलक

Monday, April 16, 2012

दिल्ली नगर निगम  चुनाव  2012 कई प्रकार से ऐतिहासिक है.
दिल्ली नगर निगम को 3 भागों उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी में विभाजित किये जाने के पश्चात् हुए प्रथम चुनाव में अब दिल्ली से 3 महापौर बनेंगे.
कुल 272 वार्ड हैं जिनमें आधे महिलाओं के लिए 20% अनु.जाती के लिए आरक्षित रखे गए हैं,आगामी निगम चुनाव में बदल कर आरक्षित का सामान्य और सामान्य का आरक्षित हो जायेगा. कुल 2423 प्रत्याशी खड़े हैं.
इस परिवर्तन  के कारण कई पार्षद अपना चुनाव क्षेत्र बदलने अथवा अपनी पत्नी को नामांकित करवाने को बाध्य हो गए, तथा कई विद्रोही हो गए. वैसे तो यह स्थिति दोनों प्रमुख दल भाजपा व् कांग्रेस को ही झेलनी पड़ी किन्तु देश के बिकाऊ मीडिया के लिए कांग्रेस का विद्रोह एक समाचार था और भाजपा का एक मुद्दा, जिसे उछाल कर भाजपा की छवि धूमिल की जाने से दोहरा लाभ था, TRP और सोनिया की कृपा.
 चुनाव से पूर्व कुछ सडकों व् क्षेत्रों की दुर्दशा पर युग दर्पण का रिपोर्ट कार्ड हमने जारी किया था इसमें वार्ड 100 की पार्षद हारेगी,75 का भी संभवत हारेगा. मतदान का बढता प्रतिशत संकेत दे रहा है.
जनता /आम आदमी का कांग्रेस से मोहभंग भविष्य की रूप रेखा रच रहा है.
आगामी विधान सभा और फिर लोक सभा के चुनाव आम आदमी के कोप का प्रकोप दिखायेंगे.
   यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था, आज भी इसमें वह गुण,योग्यता व क्षमता विद्यमान है!
आओ मिलकर इसे बनायें- तिलक
"अंधेरों के जंगल में,दिया मैंने जलाया है!
इक दिया,तुम भी जलादो;अँधेरे मिट ही जायेंगे !!"- तिलक

Saturday, March 31, 2012

श्री राम नवमी की कोटि कोटि हिदू समाज सहित आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं.....



लाखों वर्ष पूर्व त्रेता युग में  जब श्राप जनित रावण कुम्भकरण व् पुत्र मेघनाद, अक्षय सहित अपनी असीम अजेय मायावी शक्तियों से मदांध हो चुका था और उसके दुष्ट सिपाहियों से त्रस्त मानवता त्राहि त्राहि कर उठी थी; नगर ही नहीं जंगलों में रहते ऋषि मुनि भी यज्ञ साधना नहीं कर पाते थे ! 
ऐसे में चैत्र शुक्ल नवमी के दिन अयोध्या के महाप्रतापी महाराजा दशरथ की महारानी कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवन विष्णु के सातवें अवतार प्रभु श्री राम अवतरित हुए  ! चैत्र शुक्ल के शक्ति पूजन का नोवां दिन होने तथा श्री राम का जन्म होने से इसे राम नवमी के नाम से जाना जाता है ! 
उत्तर प्रदेश के अयोध्या, आंध्र प्रदेश के भद्राचलम ,तमिलनाडु के रामेश्वरम में इस अवसर पर विशेष आयोजनों सहित पूरे देश ही नहीं विश्व में जहाँ भी हिन्दू समाज है 9 दिन के व्रत उपवास पूजा पाठ के बाद इस दिन श्री राम लक्ष्मण माता सीता व् हनुमानजी की रथ यात्रा धूम धाम से निकाली जाती है तथा प्रसाद लंगर की व्यवस्था भी होती है ! 


तिलक राज रेलन,  संपादक युग दर्पण , 09911111611, 9654675533.
पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है-युगदर्पण"अंधेरों के जंगल में,दिया मैंने जलाया है! इक दिया,तुम भी जलादो;अँधेरे मिट ही जायेंगे !!"- तिलक